क्या यह लाश उसी की है?
क्या यह लाश उसी की है रात का सन्नाटा जैसे पूरे शहर को अपने आगोश में ले चुका था। ठंडी हवा के झोंके वीरान सड़कों से गुजरते हुए एक अजीब-सी सरसराहट पैदा कर रहे थे। शहर के बाहरी इलाके में स्थित पुराना पुल आज भी उतना ही रहस्यमयी था जितना वर्षों पहले हुआ करता था। इंस्पेक्टर अर्जुन अपनी जीप से उतरकर पुल के किनारे खड़ा हो गया। सामने पुलिस की पीली टेप लगी हुई थी और कुछ सिपाही इधर-उधर टॉर्च की रोशनी से जगह को टटोल रहे थे। “सर, लाश यहीं मिली है,” एक कांस्टेबल ने इशारा करते हुए कहा। अर्जुन धीरे-धीरे आगे बढ़ा। जमीन पर एक सफेद चादर से ढकी आकृति पड़ी थी। उसने चादर को थोड़ा सा उठाया—और एक पल के लिए उसकी सांस थम गई। चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। बुरी तरह कुचला हुआ। लेकिन कुछ था… कुछ ऐसा जो उसे अंदर तक हिला गया। “क्या यह…?” उसके होंठों पर शब्द अटक गए। “सर?” कांस्टेबल ने पूछा। अर्जुन ने चादर वापस ढक दी। “पोस्टमॉर्टम के लिए भेजो। और… इस केस को मैं खुद देखूंगा।” उस रात अर्जुन को नींद नहीं आई। बार-बार वही सवाल उसके दिमाग में घूम रहा था— क्या यह लाश उसी की है? 1. अतीत की परछाइयाँ तीन साल पहले… अर्जुन और...